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Sunday, April 5, 2020

मूर्ख सेवक - Murkh Sevak Ki Kahani Lok Katha

मूर्ख सेवक - Murkh Sevak

एक बार की बात है एक राज्य में एक राजा हुआ करता था !और उसी राज्य का एक सेवक वासुदेव उस राजा का घनिष्ठ मित्र था!
 
वासुदेव राजा के पास ही रहता था राजा पर किसी भी प्रकार विपदा आये तो वह हमेशा  उनकी देखभाल में लग जाता था
परंतु मूर्ख तो मूर्ख ही होता है!
 
एक बार राजा की सेहत बिगड़ गई और वासुदेव उनकी सेवा में थे सेवक ने राजा को खानपान दिया और राजा अपने बिस्तर पर सोने को चल दिये! 
और उन्होंने सेवक को निर्देश दिया कि उनके आवास में रहकर वह देखरेख करें
जैसे ही राजा नींद में  चले गए!

तभी एक मक्खी आई और राजा के इर्द-गिर्द घूमने लगी सेवक को यह बात पसंद नहीं आई उसने मक्खी को दूर भगाने के लिए अपने हाथों से उस पर प्रहार किया  परंतु मक्खी टस से मस ना हुई सेवक ने दोबारा प्रयत्न किया कि मक्खी राजा से दूर चली जाये !
 
एक बार के लिये मक्खी उड़ तो गई परंतु कुछ देर बाद वह वापस राजा के नाक पर बैठ गई या देखकर सेवक आग बबूला हो उठा उसने ना इर्द गिर्द देखा उसने फट से राजा की तलवार उठाई और मक्खी पर प्रहार किया मक्खी तो उड़ गए लेकिन राजा के दो टुकड़े हो गया

सिख्:- मूर्खों से दूरी बनाए रखें नहीं तो कभी भी आपको अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है!

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