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Thursday, February 13, 2020

Satir Billi - सातिर बिल्ली

Satir Billi

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Satir Billi - सातिर बिल्ली


एक जंगल में विशाल वृक्ष के तने में एक खोल के अन्दर रिंकी नाम का तीतर रहता था एक दिन वह तीतर अपने साथियों के साथ बहुत दूर के खेत में धान की नई-नई फसलें खाने चला जाता था
बहुत रात बीतने के बाद उस वृक्ष के खाली पड़े खोल में पिंकी नाम का खरगोश घुस आया और वहीं रहने रहने लगा।
कुछ दिन बाद रिंकी तीतर अचानक ही गया धान की नई-नई कोंपले खाने के बाद वह खूब मोटा-ताजा हो गया था अपनी खोल में आने पर उसने देखा कि वहाँ एक खरगोश बैठा है उसने खरगोश को अपनी जगह खाली करने को कहा
खरगोश भी तीखे स्वभाव का था; बोला ----"यह घर अब तेरा नहीं है वापी, कूप, तालाब और वृक्ष के घरों का यही नियम है कि जो भी उनमें बसेरा करले उसका ही वह घर हो जाता है घर का स्वामित्व केवल मनुष्यों के लिये होता है , पक्षियों के लिये गृहस्वामित्व का कोई विधान नहीं है "
झगड़ा बढ़ता गया अन्त में, रिंकी ने किसी भी तीसरे पंच से इसका निर्णय करने की बात कही उनकी लड़ाई और समझौते की बातचीत को एक जंगली Billi सुन रही थी। उसने सोचा, मैं ही पंच बन जाऊँ तो कितना अच्छा है; दोनों को मार कर खाने का अवसर मिल जायगा
यह सोच हाथ में माला लेकर सूर्य की ओर मुख कर के नदी के किनारे कुशासन बिछाकर वह आँखें मूंद बैठ गयी और धर्म का उपदेश करने लगी। उसके धर्मोपदेश को सुनकर खरगोश ने कहा---"यह देखो ! कोई तपस्वी बैठा है, इसी को पंच बनाकर पूछ लें "
पिंकी; Billi को देखकर डर गया; दूर से बोला----"मुनिवर ! तुम हमारे झगड़े का निपटारा कर दो जिसका पक्ष धर्म-विरुद्ध होगा उसे तुम खा लेना "
यह सुन Billi ने आँख खोली और कहा--- "राम-राम ! ऐसा कहो मैंने हिंसा का नारकीय मार्ग छोड़ दिया है अतः मैं धर्म-विरोधी पक्ष की भी हिंसा नहीं करुँगी हाँ, तुम्हारा निर्णय करना मुझे स्वीकार है किन्तु, मैं वृद्ध हूँ; दूर से तुम्हारी बात नहीं सुन सकती, पास आकर अपनी बात कहो "
Billi की बात पर दोनों को विश्वास हो गया; दोनों ने उसे पंच मान लिया, और उसके पास गये उसने भी झपट्टा मारकर दोनों को एक साथ ही पंजों में दबोच लिया
और उनका विवाद निपट गया; और वह भी निपट गया!
सीख- दूसरों की बात पर चलने से पहले उनके बारे में जान ले!

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