Hindi Rochak Kahaniya

Top Site For Hindi Quotes, Hindi Stories, Chanakya Neeti, Hindi Poems, Hindi Personality Development Articles, Hindi Essays And Much More In Hindi

Wednesday, February 19, 2020

Ek Kaali Dayan - Nani कि कहानी

Ek Kaali Dayan

ek-kaali-dayan


एक काली Dayan : Nani कि कहानी


यह कहानी एक Dayan की है! काली Dayan इस कहानी का नाम हे दोस्तों मैंने यह कहानी बनाकर नहीं लिखी यह कहानी एक सचमुच की घटना है जो की मैंने अपनी दादी से सूनी है और बहुत पुरानी है कुछ लोगों का मानना है की भूतों का कोई अस्तित्व नहीं होता है!आप लोग जानते हैं भगवान् का अस्तित्व होता है है! तो भूतों का क्योँ नहीं सभी ने रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों मैं पढ़ा या किसी से सुना होगा की भगवान् जब इस धरती पर थे तब भी भूत पिशाच हुआ करते थे भगवान् निराकार है! निराकार का अर्थ होता है जिसका कोई आकर नहीं होता जो लोग जिस रूप मैं भगवान् को पूजते हैं भगवान् उसी रूप मैं उसे दिखाई देते हैं ! तो प्रेम से बोलिए भक्त और भगवन की जय और समय ब्यर्थ करते हुए मैं आपको अपनी कहानी की और ले चलता हूँ बहुत पुरानी बात है तब पानी के ज्यादा शाधन नहीं हुआ करते लोग कुए बाबड़ी तालाब आदि से पानी पिया करते थे!

तो यह कहानी भी एक तालाब की है! जो कि उस काली Dayan के जादू से अमृत से ज़हर बन गया था! यह Dayan कैसे बनी कैसे इस तालाब का पानी विष बन गया मैं यह कहानी आपको बताता हूँ!एक गाँव मैं एक औरत के कोई बच्चा नहीं था! वह औरत गांव के मुखिया की पत्नी थी उसके शादी को काफी समय हो गया था! सब लोग उसे बाँझ कहा करते थे!सारे गाँव वाले उसका मुंह भी नहीं देखना कहते थे कहते थे कि इसका मुंह देख लिया तो पूरा दिन बेकार चला जायेगा पर मुखिया कि पत्नी थी इसलिए लोग थोड़ी बहुत बात चीत कर लिया करते थे!एक दिन गांव मैं एक फकीरा बाबा भिक्षा मांगते हुए पहुँचता है तो वह बतों ही बातों मैं उसका हाथ देखने लग जाता है! और कहता है आपको बच्चा नहीं है ना वह बोली आपको कैसे पता चला वह बोला हम हस्त रेखा मैं निपुण है और हाथ देखकर यह बता सकते हैं कि क्या होने वाला है क्या होगा वह बोली अच्छा तो यह बताओ कि मेरे बच्चा कब होगा तो उसने कहा आपको भगवान् ने बच्चा तो नहीं दिया पर मैं एक रास्ता बताता हूँ!वह सुनो अमावस्या की रात को किसी एक ऐसे लड़के कि बलि पीपल के पेड़ के नीचे दो!जो अपने माँ बापके एकलोता पुत्र हो औरउसके खून से अपने बाल धोना फिर कहना प्यासी आत्माओ यह बलि मेरी तरफ से स्वीकार करो और मुझे एक पुत्र दे दो!

एक लोटे मैं उस कुए का पानी भर कर उस मैं उसके सरीर की दो बून मिला कर खुद पी लेना और उस लड़के के सिर के बाल अपनी साडी की गांठ मैं बंधे रखना तो युम्हे अवस्य एक पुत्र पैदा होगा इतना कहकर वह वहां से भिक्षा लेकर चला गया! उस दिन के ठीक तीन दिन बाद अमावश्या थी उस औरत ने वही किया जो उस बाबा ने बताया था उसने अपने देवरानी के लड़के कि बलि दे दी और खून की दो बूंदे पानी मैं मिलाकर खुद पी लिया और उस सिर के कुछ बाल को काटकर अपनी गांठ मैं बांध लिया और बिना पीछे मुड़े अपने घर गयी सुबह गांव बालों को पता चला कि मुखिए के भाई के बेटे को किसी ने मार के वहां फेक रखा है

जब यह बात मुखिए और उसके भाई ने सूनी तो वह नंगे पैर दौड़ पड़े धीरे धीरे सारा गांव इकठ्ठा हो गया उस लड़के की माँ का रो रो बुरा हो गया था!तब किसी व्यक्ति ने हिम्मत जुटाकर उस सिर को धड से जोड़ा और उसे नदी मैं बहाने की सलाह दी वेसा ही किया लोगो ने उस लाश को पानी मैं बहा दिया!सब लोग यही कह रहे थे किसने किया यह सब कैसे हुआ सब लोगों केलिए यह घटना चिंता का विषय बन गयी थी! जब मुखिया घर पहुंचा तो क्या देखता है की उसकी पत्नी तो पकवान बना रही थी वह बड़ी खुश नज़र रही थी मुखिया ने क्रोध मैं कहा क्या तुम्हे इस बात का बिलकुल भी दुःख नहीं है की हमारे भाई का बेटा मर गया है वह पहले ऐसी नज़रों से देखी जैसे की उसे मार ही डालेगी फिर कहने लगी लड़का उसका मरा है मेरा नहीं मैं क्योँ शोक मनाऊँ और हसने लगी और कहने लगी तुम पागल हो तुम्हे तो खुस होना चैये की अब तुम्हारे भी एक पुत्र आने वाला है और यह जान कर और ख़ुशी होगी की वह इस जायदात का अकेला वारिस होगा हां हां हां वह फिर ऐसे हसी यह देखकर मुखिया से रहा नहीं गया और उसे जान से मारने के लिए तलवार उठाने चला गया वह अन्दर तलवार ढून्ढ रहा था पर तलवार नहीं मिली!जब वह पत्नी के बेद के पास पहुंचा तो क्या देखता है की सारे कपडे खून से लथपत हैं और तलवार भी वही पडी है और उस पर खून लगा है वह यह सब देखते ही समझ गया की यह सब इसने पुत्र प्राप्ति केलिए बलि दी है उसने उसे मारने का विचार बनाया की अभी मैं इसको मार दूंगा तो सब लोग मुझे गलत समझेंगे!

और वह वहां से चला गया उस दिन से गाँव मैं ऐसी ऐसी घटना होने लगी किसी की भैंस मर गयी किसी ने उसे मार डाला और उस के सरीर के अंग इधर-उधर फैले पड़ेजैसे की किसी ने उसे नोच नोच कर खाया हो तो किसी दिन किसी का कुत्ता किसी का बछडा तो किसी की बकरी मर गयी और उसी तरीके से वह मर रही थी जिस तरीके भैंस को किसी ने मारा था ऐसी घटना से सारा गांव परेशान था किसी को यह समझ नहीं रहा था की आखिर हो क्या रहा है! एक दिन की बात है मुखिया रात को अपने गेट के पास सोया हुआ था आधी रात के समय उसे गेट खुलने की आवाज आई वह जाग गया उसने देखा की एक औरत बाल फिकरे हुए आधी रात को बहार चली जा रही है देखने मैं तो ऐसा लग रहा था की जैसे उसको कोई खींच कर ले जा रहा हो! भादों(अगस्त) की काली रात थी चरों तरफ से आवाजें रही थी कही शियार तो कहीं कुत्ते भोकते ऐसा लग रहा था उसे की जैसे यह रात जाने क्या क़यामत ढायेगी!अचानक उसे एक गाय के बछड़े के रंभाने की आवाज आई वह समझ गया हो हो यही सारे गांव की बर्बादी का कारन हैं! मुखिया के दिमाग मैं एक आइडिया आया की क्योँ मैं चलकर देखूं की यह कहाँ जाती है! वह उठकर चल दिया उसने आगे चल के क्या देखा कि पड़ोसी के गाय का बछड़ा का कटा हुआ मुंड पडा है और उसके धड को वह औरत खींचकर पीपल की और ले जा रही हे और ले जा कर उसने वही शब्द दोहराया यह लो प्यासी आत्माओ मैं तुम्हारे लिए भोजन लायी हूँ! मुखिया यह सब नीम के पेड़ से छुपकर देख रहा था! एक दम वह क्या देखता है कि चार काली छाया वहाँ प्रकट हुई देखते ही देखते वह ऐसे भयानक सरीर मैं बदल गयी की उसे देखकर उसके सर्रीर के रोयें खड़े हो गए उनके ये बड़े-बड़े दांत लाल-लाल आंखें सरीर पूरा जला हुआ बड़े बड़े नाखून आंखें तो ऐसे चमक रहीं थी की बार-बार बदलने वाली लाइट जल रही हो इतना भयानक द्रश्य उसने अपनी ज़िन्दगी मैं कभी नहीं देखा था!

वह क्या देखता है कि वो चरों भूत और उसकी पत्नी उस लाश को खाने लगी दोनों हाथों से लापा-लप जैसे की कोई भूखा व्यक्ति खाने पर टूट पड़ता है!यह सब देखकर मुखिया के पर के नीचे की ज़मीन खिशक गयी की उसकी पत्नी एक Dayan है! जब उन्होंने सारे मांश को नोच-नोच कर खा डाला तब उसने एक भूतों की एक बात सूनी और कहा की बस तीन दिन बाद फिर अमवस्या है और हमारी शक्ति उस दिन बढ़ जायेगी तब हम तुम्हे पुरी शक्ति शोंप देंगे और तुम अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकती हो तुम गांव वालों को अपनी उंगली पर नाचा सकती हो!उसने यह सब सुनकर सारे गाँव को चोरी-चोरी जगा करके कहा देखो मैं तुम्हे बताता हूँ की तुम्हारी बर्बादी एक Dayan की वजह से हुई है! और सब से कहा की अपनी अपनी लाठी उठाओ और चलो मेरे साथ आज उस Dayan का अंत हम सब मिलकर करेंगे! और सब भागते हुए उस पीपल की और चल दिए सारे गांव को अपनी तरफ आते देख सारे भूत तो गायब हो गए पर वह Dayan खडी रह गयी! मुखिया की पत्नी को इस हालत मैं देखकर सारे गांव वालों के तो होश उड़ गए और वह रुक गए मुखिया ने कहा खड़े क्योँ रह गए यह तुम्हारी मालकिन नहीं Dayan है Dayan और यह बोलते हुए सब उसे लाठियों से मारने लगे वह अपनी जान बचाकर भागी और भागते हुए उस कुए मैं जा गिरी उसकी साडी ऊपर अटक गयी और वह चिल्लाने लगी बचाओ बचाओ सारे गांव नव कहा इसे सजा अपने आप मिलेगी लटकी रहने दो इसे वह चिल्लाती रही सारे लोग उसका यह तमाशा देख्र रहे थे!वह चीखती रही चिल्लाती रही मुझे ऊपर निकालो मुझे पानी पिलाओ पर किसी ने उसकी सहायता नहीं की पर वो बार-बार यही बोलती रही कि मैं तुम सब गांव वालों को बर्बाद कर दूंगी!एक एक को मैंने पानी के लए नहीं तर्शाया तो मेरा नाम भी काली Dayan नहीं!

यही नाम दिया हैं तुमने मुझे मैं तुम्हीं छोडूंगी नहीं दो दिन तक उसकी लाश यूंही लटकती रही तीसरे दिन अमावस्या थी उस दिन की रात के बाद उस लाश का पता नहीं चला की कहाँ गयी उसकी लाश जबकि कुआ बिलकुल सूखा था! उस बात को काफी टाइम हो चुका था लोग उसके बारे मैं भूल चुके थे कुछ दिन बाद ऐसी ऐसी खबर सुनने मैं मिली की उस कुए से आवाजें आती है कभी वही बात सुनाई पड़ती की मैं तुम लोगो को पानी के लिए तडपा दूंगी और कभी रात मैं मन्त्रों की आवाजें आती लोग उस राज़ को समझ रहे थे कि उसका जब तक शरीर नहीं जल जाता तबतक उसकी आत्मा भटकती रहेगी!कुछ दिनों बाद गांव के कुए का अचानक पानी सूख गया तो वो लोग परेशान हो गए कुछ इनो बाद क्या देखते हैं की जिस कुए मैं वह मारी थी वह पानी से भर गया है! यह आश्चर्य देखते हुए कुछ लोगों ने कहा क्या पता है की उसी ने यह सब किया हो कुछ लोग कह रहे थे की उस बात को बहुत समय हो गया है अब वो यहाँ कहाँ राखी है और कहा चलो पानी इसी से खीच के पिया करेंगे!सुबह जब कुछ लोगों ने कहा चल कर पानी खींचते हैं जब कुए के पास पहुंचे तो कुए मैं पानी नही यह सब देखकर लोग आश्चर्य मैं पड़ गए की पानी गया कहाँ तब उसमें से अजीब आवाज आई कहा था पानी के लिए तडपा दूंगी मुझे पानी नहीं पिलाया था तुम लोगो ने हा हा हा हा

अब मैं तुम सबको पानी के लिए ही नहीं खाने के लिए भी मुंहताज कर दूंगी यहाँ अब कभी पानी नहीं बरसेगा हा हा हा हा अब गाँव वाले परेशान हो गए उनके पास पानी ख़तम हो गया था दुसरे गांव से पानी लाना पड़ता था पानी बरसने के कारण वह कुआ भी सूखने लगा तब उस गाँव के मुखिया ने भी उन्हें पानी भरने के लिए मन कर दिया और कहा तुमने जो किया है उसके लिए हम क्योँ दुःख झेलें जाओ!अब उसे भुगतो!कभी कुए मैं पानी जाता तो कभी नहीं जब गांव वाले प्यास से परेशान हो गए तो कुछ लोग ने उस से पानी खींच लिया और उसे जैसे ही पिया तो उसका सरीर पूरी तरह

सड गया किसी को चरम रोग हो गया किसी के हाथ पैर गलना सूरू हो गए यह भयानक द्रश्य देखकर और लोगो ने तो उसे छुआ तक नहीं अब गाँव वालों की बुरी दशा हो गयी सब लोग भगवान् को याद करने लगे है भगवन यह सब किस जन्म के पापों की सजा दे रहा है तू बस चरों तरह हा हाकार मच गयी!उस दिन से गांव मैं तो जैसे मातम सा छा गया हो! दुसरे दिन सुबह मैं उस गांव से एक बाबा आता हुआ नज़र आया सफ़ेद वस्त्र माथे पे तिलक हाथ मैं कमंडल एक हाथ मैं माला बस राम का नाम लेते हुए चले रहे थे! सब गांव वालों ने उस बाबा को आते देख सब लोग उनके चरणों मैं गिर पड़े और कहने लगे बाबा हमे इस संकट से बचालो! बाबा ने कहा क्या बात है आप सारे गांव वाले इतने परेशान क्योँ हो तब बाबा को मुखिया ने सारी बात बताई तब बाबा ने कहा की मैं तुम्हारी इस काम मैं अवस्य मदद करूंगा और कहा मैं कल अपने शिष्य विराट को ले कर आऊँगा क्योँ की इस काम के लिए मुझे एक सदभाव और ईश्वर पर विश्वास करने वाले व्यक्ति की ज़रुरत हे और वह बुद्धि मैं भी निपुण है! आप लोग धेर्य रखिये मैं अवश्य वापस आऊँगा यह कह कर बाबा वहां से चले गए दुसरे दिन सूर्य उदय होने से पहले वह अपने शिष्य विराट के साथ उस गांव मैं पहुँच गए! सब लोगो ने बाबा को प्रणाम किया बाबा ने कहा की कुछ लोग जा कर पूजा का सामन ले कर आओ मैं यहाँ पर हवन करूंगा और अपने शिष्य से कहा की तुम इस कुए मैं अन्दर जा कर उस Dayan का अंत करोगे और अमीन तुम्हे कुछ ध्यान मैं रखने वाली बाते बताता हूँ कि इस कुए मैं उतरने से पहले तुम्हे सच्चे मन से भगवान् का स्मरण करके बिना मुंह मैं पानी जाये हुए नीचे पहुंचना पड़ेगा और तुम्हें इस कुए की गहराई यानी पातळ तक पहुँचाना पड़ेगा ध्यान रहे यह काम सूरज डूबने से पहले ख़तम करना पडेगा क्यूंकि दिन के डूबते ही बुरी आत्माओ की शक्ति बढ़ जाती है!

ध्यान रहे की सबसे पहले Dayan के बाल काटने हैं जिससे वह कमजोर पड़ जायेगी जब वह पूरी तरह से कमजोर पड़ जाए तब भगवान् का नाम लेकर यह खंज़र जो मैं तेरे को दे रहा हूँ इससे उसको मार देना और उसके सरीर को जला देना और मैं यहाँ यज्ञ करके तुम्हारी मदद करूंगा!उनका शिष्य तो समझ गया पर कुछ गाँव वालों ने पुछा बाबा इस कए मैं पानी मैं कैसे उसकी लाश को जलाओगे तब बाबा ने बताया कि वह पाताल लोक मैं अपने घरों की तरह रह रही है वहां भी आत्माओ और भूत प्रेतों के घर हुआ करते हैं!तब गाँव वालों को समझ मैं आया!बाबा ने अपने शिष्य से कहा की अब देर मत करो तुम जल्दी जाओ! तब उनका शिष्य ने भगवान् का नाम लेकर उस कुए मैं कूद गया! और इधर बाबा मन्त्रों से यज्ञ करने लगे!जब विराट वहां पहुंचा तो क्या देखता है काफी बड़ा खंडर है और कहीं से मन्त्रों की आवाजें रही हैं तो वो वह जाकर क्या देखता की एक बाल फकेरे हुए एक औरत आहुत्ति आग मैं दीये जा रही है! जैसे ही वह उसके पास पहुंचा तो उसे पता चल गया और वह पीछे मुड़कर देख के बोली कौन हो तुम और यहाँ क्योँ आये हो वह बोला मैं विराट हूँ और गांव वालों की तरफ से मैं तुम्हें यहाँ मारनेके लिए आया हूँ!

वह हँसी हा हा हा हा तुम मरोगे मुझे साधारण मनुष्य गांव वालों ने तुझे भेजा और तू मरने चाला आया लौट जा और अपने प्राण बचा ले मुझसे नहीं तो वह बोला नहीं तो क्या मुझे मार डालोगी वह बोली समझदार हो वह बोला तू अपने प्राण बचाना चाहती है तो इस गांव और इस कुए को छोड़कर चली जाओ नहीं तो मुझे मारना होगा! उसने इतना कहकर जैसे ही उसके ऊपर उसे मारने को झपटा वह एक दम गायब हो गई और उसका बार खाली निकल गया अब बस उसे उसकी आवाज सुनाई दे रही थी अब वह क्या करे उसके पीछे से उसे एक बार उसने उसे ऐसा मारा की उसका सिर दीवार से टकराया और बेहोश हो गया तभी उसे उसके गुरु की आव्वाज सुनाई दी बेटे अपनी आत्मा की शक्ति से देख और भगवान् क्या ध्यान लगा तुझे सब कुछ नज़र आएगा! उसने भगवान् का ध्यान करके आंखें खोली तो उसे वह Dayan दीवार से छुपी हुई नज़र आई और उसके बाल दिख रहे थे तभी उसको गुरु की बात का ध्यान आया तो उसने झट से उसके बाल काट दिए और वह झट से उसको मारने के लिए खंज़र उठाया तो वह गिडगिडाने लगी की तुम आदमी हो मैं औरत और मैं निहत्थी हूँ तुम मुझे छोड़ दो और रोने लगी बाल काटने से उसकी सारी शक्ति कमज़ोर पड़ गयी पहले तो उसे उस पर दया आई पर जब गाँव वालों के दुःख को याद किया तो उसने देर करते हुए वह खंज़र उसके सीने के बीच उतार दिया और उस अग्नि कुंड मैं उसके शरीर को जला दिया उसकी आत्मा चीखती चिल्लाती हुई मैं वापस आऊँगी मैं वापस आऊँगी उस कुए से ऊपर से निकल गयी जब गांव वालों ने वह आत्मा देखी तो वह लोग डर गए तब बाबा ने कहा अब कोई डरने की बात नहीं है अब इसका शरीर खत्म हो चुका है!अब यह तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती तभी विराट कुए से बाहर आया तब गांव वालों ने उस बधाई दी और कहा की अगर तुम ना होते तो पता नहीं हमारा क्या होता तब विराट ने कहा यह सब तो भगवान् की कृपा है!

तब बाबा ने गांव वालों से कहा अब तुम ख़ुशी ख़ुशी से इस कुए का पानी पी सकते हो! सभी गांव वालों ने पानी पिया और बाबा का आदर सत्कार किया! तभी जोर-जोर से बदल हुए और पानी बरसने लगा और गांव वाले ख़ुशी से झूम उठे तब उस गांव मैं फिर से खुशहाली छा गयी! दोस्तों तो यह थी काली Dayan की कहानी यह तो आपको पता होगा कि आप लोगों को कैसी लगी! पर मनुष्य एक ख़ुशी के लिए इतनी हथ्याएँ करे तो वह ख़ुशी नहीं खुद-ख़ुशी है क्यों कि ऐसे लोगों को भगवान् भी अपनी शरण भी नहीं देता!क्या पता वह बाबा जी ही भगवान् ही बन कर आये हों

No comments:

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.