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Monday, February 3, 2020

Ek Chudail Ki Kahani - एक चुड़ैल की कहानी

Ek Chudail Ki Kahani

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Ek Chudail Ki Hain Kahani!

यह कहनी है अमावस की उस काली रात की जब मै अपने गाव मे था बात उस वक्त कि है जब मै दसवी मे था  और उन दिनो हमारी दसवी की परीछा  चल रही थी और मे  परीक्षा की तैयारी में था रातो तक जगना पढाई करना होता था और फिर एक बारी के लिये खुले हवा मे आना हमारे गाव मे एक पिपल का पेड़ हुआ करता था और उसी पेड़ के निचे एक बहुत पुराना कुआ भी था लोग कह्ते है रात के समय उस कुए के पास जाना बेहद डरावना होता है.  क्योंकि लोगों का कहना है वहां Chudail का वास है.

बहुत दिनो से मुझे भी होड थी की आखीर है किया वो बला लोग क्यों डरते हैं भला आखिर ऐसा है क्या उस कुएं के पास मानो जानने की एक जिद्द सी हो गई थी. फिर एक दिन मैं अपनी पढ़ाई खत्म कर खुले हवा में घर से बाहर निकला  मौसम ठंड  और हवाएं तेज थी कुछ दूर चलते ही सामने वह पेड़ था और पेड़ के नीचे वह कुआं जेहन में डर भी था और इच्छा भी कि आखिर उस पेड़ के नीचे है क्या तभी अचानक से खुशबूदार हवा चली मानो मुझे ऐसा लगा कि मेरे पीछे कोई खड़ा है  जैसे ही मैंने पीछे मुड़ कर देखा वहां कोई नहीं था सुनसान सड़क थी और तेज हवाओं के चलते पेड़ों की सरसराहट की आवाज. एक बारी के लिए मुझे लगा कि कहीं वह Chudail तो नहीं

वह पेड़ और कुआं बहुत करीब था मेरे जैसे-जैसे मैं इस पेड़ की ओर बढ़ रहा था मेरी घबराहट और तेज हो रही मैं उस पेड़ के पास पहुंचने ही वाला था कि मैं हिम्मत हार बैठा और घर को वापस हो गया
 सुबह होते ही यह बात मैंने मां को बताई मां भी सुनकर भौचक्का रह गई और मीठी आवाज में मुझे समझाने लगी मां कहने लगी बेटा तुम ऐसा क्यों करते हो मैंने कितनी बार मना किया कि उस पेड़ और कुएं के पास मत जाना मां की बात सुनकर मैंने मां से पूछ ही लिया आखिर ऐसा है क्या मां उस पेड़ और कुएं के पास मां ना चाहते हुए भी मुझे बताने को विवश हुई
उन्होंने कहा हमारे गांव की एक औरत हुआ करती थी जो हमेशा उसी कुएं से पानी लिया करती थी वह बेहद खूबसूरत और खुशबूदार और सुशील थी जिसका नाम था पद्मिनी था पर लोग उसे पदमा कहते थे  वह हमेशा संध्या के समय  कुवे से पानी भरा करते थी
 फिर 1 दिन ऐसा हुआ कि वह पानी भर रही थी और पानी भरते ही कुएं से आवाज आई छपाक की मानो कुएं में कोई गिर गया है.

हां सच में पद्मिनी कुएं में गिर गई थी  कुछ ही देर में वहां लोगों का जमाव हो गया भीड़ से आवाज आ रही है कोई तो इसे बचाओ परंतु कोई आगे आकर पद्मनी को ना बचा सका वह कुएं में डूबते हुए चिल्लाते रही बचाओ बचाओ  परंतु कोई आगे ना आ सका और पद्मिनी की जान चली गई फिर क्या था  उस कुवै से गांव के लोगों ने पानी लेना बंद कर दिया  और लोग कहते हैं कि वह Chudial  बनकर उसी कुएं में रहती है
 लोगों का मानना है कि कई बार उन्होंने उन्हें देखा भी है कई बार तो वह कुएं से आवाज भी लगाती है आओ आओ पानी ले जाओ आओ आओ पानी ले जाओ और आज भी लोग उस Chudial के डर से उस कुएं से पानी नहीं लेते हैं और आज भी वह Chudail रातों को कुएं के पास घुमा करती है और खुशबू बिखेरा करती है
फिर क्या था मैंने मां की बातों को सुना  और रातों को घर से बाहर निकलना बंद कर दीया
 परंतु आज भी जेहन में यह बात उठती है कि क्या यह वाकई हकीकत है या सिर्फ एक कहानी आज भी एक अरसा बीत गया है पर लोग आज भी  उस कुएं के पास जाने से डरते हैं  और आज भी अगर मैं उस कुएं की ओर बढ़ता हूं  तो मा के बताएं अल्फाजों से मेरे पांव रुक जाते हैं.

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